सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को लेकर सवाल उठाए हैं। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि यदि कोई कंपनी दवा दुकानदार को 2,700 रुपये में बेचती है तो उसी पर 27,000 रुपये एमआरपी क्यों दर्ज की जाती है। अदालत ने दवाओं की कीमतों की निगरानी करने वाली सरकारी अथॉरिटी की भूमिका पर भी सवाल किया। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।